< Deuteronomy 28 >

1 And it shall come to pass, if thou shall hearken diligently to the voice of Jehovah thy God, to observe to do all his commandments which I command thee this day, that Jehovah thy God will set thee on high above all the nations of the earth,
“यदि तू अपने परमेश्वर यहोवा की सब आज्ञाएँ, जो मैं आज तुझे सुनाता हूँ, चौकसी से पूरी करने को चित्त लगाकर उसकी सुने, तो वह तुझे पृथ्वी की सब जातियों में श्रेष्ठ करेगा।
2 and all these blessings shall come upon thee, and overtake thee, if thou shall hearken to the voice of Jehovah thy God:
फिर अपने परमेश्वर यहोवा की सुनने के कारण ये सब आशीर्वाद तुझ पर पूरे होंगे।
3 Blessed shall thou be in the city, and blessed shall thou be in the field.
धन्य हो तू नगर में, धन्य हो तू खेत में।
4 Blessed shall be the fruit of thy body, and the fruit of thy ground, and the fruit of thy beasts, the increase of thy cattle, and the young of thy flock.
धन्य हो तेरी सन्तान, और तेरी भूमि की उपज, और गाय और भेड़-बकरी आदि पशुओं के बच्चे।
5 Blessed shall be thy basket and thy kneading-trough.
धन्य हो तेरी टोकरी और तेरा आटा गूँधने का पात्र।
6 Blessed shall thou be when thou come in, and blessed shall thou be when thou go out.
धन्य हो तू भीतर आते समय, और धन्य हो तू बाहर जाते समय।
7 Jehovah will cause thine enemies that rise up against thee to be smitten before thee. They shall come out against thee one way, and shall flee before thee seven ways.
“यहोवा ऐसा करेगा कि तेरे शत्रु जो तुझ पर चढ़ाई करेंगे वे तुझ से हार जाएँगे; वे एक मार्ग से तुझ पर चढ़ाई करेंगे, परन्तु तेरे सामने से सात मार्ग से होकर भाग जाएँगे।
8 Jehovah will command the blessing upon thee in thy barns, and in all that thou put thy hand to. And he will bless thee in the land which Jehovah thy God gives thee.
तेरे खत्तों पर और जितने कामों में तू हाथ लगाएगा उन सभी पर यहोवा आशीष देगा; इसलिए जो देश तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे देता है उसमें वह तुझे आशीष देगा।
9 Jehovah will establish thee for a holy people to himself, as he has sworn to thee, if thou shall keep the commandments of Jehovah thy God, and walk in his ways.
यदि तू अपने परमेश्वर यहोवा की आज्ञाओं को मानते हुए उसके मार्गों पर चले, तो वह अपनी शपथ के अनुसार तुझे अपनी पवित्र प्रजा करके स्थिर रखेगा।
10 And all the peoples of the earth shall see that thou are called by the name of Jehovah, and they shall be afraid of thee.
१०और पृथ्वी के देश-देश के सब लोग यह देखकर, कि तू यहोवा का कहलाता है, तुझ से डर जाएँगे।
11 And Jehovah will make thee plenteous for good, in the fruit of thy body, and in the fruit of thy cattle, and in the fruit of thy ground, in the land which Jehovah swore to thy fathers to give thee.
११और जिस देश के विषय यहोवा ने तेरे पूर्वजों से शपथ खाकर तुझे देने को कहा था, उसमें वह तेरी सन्तान की, और भूमि की उपज की, और पशुओं की बढ़ती करके तेरी भलाई करेगा।
12 Jehovah will open to thee his good treasure the heavens, to give the rain of thy land in its season, and to bless all the work of thy hand. And thou shall lend to many nations, and thou shall not borrow.
१२यहोवा तेरे लिए अपने आकाशरूपी उत्तम भण्डार को खोलकर तेरी भूमि पर समय पर मेंह बरसाया करेगा, और तेरे सारे कामों पर आशीष देगा; और तू बहुतेरी जातियों को उधार देगा, परन्तु किसी से तुझे उधार लेना न पड़ेगा।
13 And Jehovah will make thee the head, and not the tail. And thou shall only be above, and thou shall not be beneath, if thou shall hearken to the commandments of Jehovah thy God, which I command thee this day, to observe and to do,
१३और यहोवा तुझको पूँछ नहीं, किन्तु सिर ही ठहराएगा, और तू नीचे नहीं, परन्तु ऊपर ही रहेगा; यदि परमेश्वर यहोवा की आज्ञाएँ जो मैं आज तुझको सुनाता हूँ, तू उनके मानने में मन लगाकर चौकसी करे;
14 and shall not turn aside from any of the words which I command you this day, to the right hand, or to the left, to go after other gods to serve them.
१४और जिन वचनों की मैं आज तुझे आज्ञा देता हूँ उनमें से किसी से दाएँ या बाएँ मुड़कर पराए देवताओं के पीछे न हो ले, और न उनकी सेवा करे।
15 But it shall come to pass, if thou will not hearken to the voice of Jehovah thy God, to observe to do all his commandments and his statutes which I command thee this day, that all these curses shall come upon thee, and overtake thee:
१५“परन्तु यदि तू अपने परमेश्वर यहोवा की बात न सुने, और उसकी सारी आज्ञाओं और विधियों के पालन करने में जो मैं आज सुनाता हूँ चौकसी नहीं करेगा, तो ये सब श्राप तुझ पर आ पड़ेंगे।
16 Cursed shall thou be in the city, and cursed shall thou be in the field.
१६श्रापित हो तू नगर में, श्रापित हो तू खेत में।
17 Cursed shall be thy basket and thy kneading-trough.
१७श्रापित हो तेरी टोकरी और तेरा आटा गूँधने का पात्र।
18 Cursed shall be the fruit of thy body, and the fruit of thy ground, the increase of thy cattle, and the young of thy flock.
१८श्रापित हो तेरी सन्तान, और भूमि की उपज, और गायों और भेड़-बकरियों के बच्चे।
19 Cursed shall thou be when thou come in, and cursed shall thou be when thou go out.
१९श्रापित हो तू भीतर आते समय, और श्रापित हो तू बाहर जाते समय।
20 Jehovah will send upon thee cursing, discomfiture, and rebuke, in all that thou put thy hand to do, until thou be destroyed, and until thou perish quickly, because of the evil of thy doings, by which thou have forsaken me.
२०“फिर जिस-जिस काम में तू हाथ लगाए, उसमें यहोवा तब तक तुझको श्राप देता, और भयातुर करता, और धमकी देता रहेगा, जब तक तू मिट न जाए, और शीघ्र नष्ट न हो जाए; यह इस कारण होगा कि तू यहोवा को त्याग कर दुष्ट काम करेगा।
21 Jehovah will make the pestilence cling to thee, until he has consumed thee from off the land, where thou go in to possess it.
२१और यहोवा ऐसा करेगा कि मरी तुझ में फैलकर उस समय तक लगी रहेगी, जब तक जिस भूमि के अधिकारी होने के लिये तू जा रहा है उस पर से तेरा अन्त न हो जाए।
22 Jehovah will smite thee with consumption, and with fever, and with inflammation, and with fiery heat, and with the sword, and with blight, and with mildew. And they shall pursue thee until thou perish.
२२यहोवा तुझको क्षयरोग से, और ज्वर, और दाह, और बड़ी जलन से, और तलवार, और झुलस, और गेरूई से मारेगा; और ये उस समय तक तेरा पीछा किए रहेंगे, जब तक तेरा सत्यानाश न हो जाए।
23 And thy sky that is over thy head shall be brass, and the earth that is under thee shall be iron.
२३और तेरे सिर के ऊपर आकाश पीतल का, और तेरे पाँव के तले भूमि लोहे की हो जाएगी।
24 Jehovah will make the rain of thy land powder and dust. From the sky it shall come down upon thee, until thou be destroyed.
२४यहोवा तेरे देश में पानी के बदले रेत और धूलि बरसाएगा; वह आकाश से तुझ पर यहाँ तक बरसेगी कि तेरा सत्यानाश हो जाएगा।
25 Jehovah will cause thee to be smitten before thine enemies. Thou shall go out one way against them, and shall flee seven ways before them. And thou shall be tossed to and fro among all the kingdoms of the earth.
२५“यहोवा तुझको शत्रुओं से हरवाएगा; और तू एक मार्ग से उनका सामना करने को जाएगा, परन्तु सात मार्ग से होकर उनके सामने से भाग जाएगा; और पृथ्वी के सब राज्यों में मारा-मारा फिरेगा।
26 And thy dead body shall be food to all birds of the sky, and to the beasts of the earth, and there shall be none to frighten them away.
२६और तेरा शव आकाश के भाँति-भाँति के पक्षियों, और धरती के पशुओं का आहार होगा; और उनको कोई भगानेवाला न होगा।
27 Jehovah will smite thee with the boil of Egypt, and with the emerods, and with the scurvy, and with the itch, of which thou cannot be healed.
२७यहोवा तुझको मिस्र के से फोड़े, और बवासीर, और दाद, और खुजली से ऐसा पीड़ित करेगा, कि तू चंगा न हो सकेगा।
28 Jehovah will smite thee with madness, and with blindness, and with confusion of mind,
२८यहोवा तुझे पागल और अंधा कर देगा, और तेरे मन को अत्यन्त घबरा देगा;
29 and thou shall grope at noonday, as the blind man gropes in darkness. And thou shall not prosper in thy ways. And thou shall only be oppressed and robbed always, and there shall be none to save thee.
२९और जैसे अंधा अंधियारे में टटोलता है वैसे ही तू दिन दुपहरी में टटोलता फिरेगा, और तेरे काम-काज सफल न होंगे; और तू सदैव केवल अत्याचार सहता और लुटता ही रहेगा, और तेरा कोई छुड़ानेवाला न होगा।
30 Thou shall betroth a wife, and another man shall lie with her. Thou shall build a house, and thou shall not dwell in it. Thou shall plant a vineyard, and shall not use the fruit of it.
३०तू स्त्री से ब्याह की बात लगाएगा, परन्तु दूसरा पुरुष उसको भ्रष्ट करेगा; घर तू बनाएगा, परन्तु उसमें बसने न पाएगा; दाख की बारी तू लगाएगा, परन्तु उसके फल खाने न पाएगा।
31 Thine ox shall be slain before thine eyes, and thou shall not eat of it. Thy donkey shall be violently taken away from before thy face, and shall not be restored to thee. Thy sheep shall be given to thine enemies, and thou shall have none to save thee.
३१तेरा बैल तेरी आँखों के सामने मारा जाएगा, और तू उसका माँस खाने न पाएगा; तेरा गदहा तेरी आँख के सामने लूट में चला जाएगा, और तुझे फिर न मिलेगा; तेरी भेड़-बकरियाँ तेरे शत्रुओं के हाथ लग जाएँगी, और तेरी ओर से उनका कोई छुड़ानेवाला न होगा।
32 Thy sons and thy daughters shall be given to another people. And thine eyes shall look, and fail with longing for them all the day, and there shall be nothing in the power of thy hand.
३२तेरे बेटे-बेटियाँ दूसरे देश के लोगों के हाथ लग जाएँगे, और उनके लिये चाव से देखते-देखते तेरी आँखें रह जाएँगी; और तेरा कुछ बस न चलेगा।
33 The fruit of thy ground, and all thy labors, shall a nation eat up which thou know not. And thou shall only be oppressed and crushed always,
३३तेरी भूमि की उपज और तेरी सारी कमाई एक अनजाने देश के लोग खा जाएँगे; और सर्वदा तू केवल अत्याचार सहता और पिसता रहेगा;
34 so that thou shall be mad because of the sight of thine eyes which thou shall see.
३४यहाँ तक कि तू उन बातों के कारण जो अपनी आँखों से देखेगा पागल हो जाएगा।
35 Jehovah will smite thee in the knees, and in the legs, with a sore boil, of which thou cannot be healed, from the sole of thy foot to the crown of thy head.
३५यहोवा तेरे घुटनों और टाँगों में, वरन् नख से शीर्ष तक भी असाध्य फोड़े निकालकर तुझको पीड़ित करेगा।
36 Jehovah will bring thee, and thy king whom thou shall set over thee, to a nation that thou have not known, thou nor thy fathers. And there thou shall serve other gods, wood and stone.
३६“यहोवा तुझको उस राजा समेत, जिसको तू अपने ऊपर ठहराएगा, तेरे और तेरे पूर्वजों के लिए अनजानी एक जाति के बीच पहुँचाएगा; और उसके मध्य में रहकर तू काठ और पत्थर के दूसरे देवताओं की उपासना और पूजा करेगा।
37 And thou shall become an astonishment, a proverb, and a byword, among all the peoples where Jehovah shall lead thee away.
३७और उन सब जातियों में जिनके मध्य में यहोवा तुझको पहुँचाएगा, वहाँ के लोगों के लिये तू चकित होने का, और दृष्टान्त और श्राप का कारण समझा जाएगा।
38 Thou shall carry much seed out into the field, and shall gather little in, for the locust shall consume it.
३८तू खेत में बीज तो बहुत सा ले जाएगा, परन्तु उपज थोड़ी ही बटोरेगा; क्योंकि टिड्डियाँ उसे खा जाएँगी।
39 Thou shall plant vineyards and dress them, but thou shall neither drink of the wine, nor gather, for the worm shall eat them.
३९तू दाख की बारियाँ लगाकर उनमें काम तो करेगा, परन्तु उनकी दाख का मधु पीने न पाएगा, वरन् फल भी तोड़ने न पाएगा; क्योंकि कीड़े उनको खा जाएँगे।
40 Thou shall have olive trees throughout all thy borders, but thou shall not anoint thyself with the oil, for thine olive shall drop off.
४०तेरे सारे देश में जैतून के वृक्ष तो होंगे, परन्तु उनका तेल तू अपने शरीर में लगाने न पाएगा; क्योंकि वे झड़ जाएँगे।
41 Thou shall beget sons and daughters, but they shall not be thine, for they shall go into captivity.
४१तेरे बेटे-बेटियाँ तो उत्पन्न होंगे, परन्तु तेरे रहेंगे नहीं; क्योंकि वे बन्धुवाई में चले जाएँगे।
42 All thy trees and the fruit of thy ground shall the locust possess.
४२तेरे सब वृक्ष और तेरी भूमि की उपज टिड्डियाँ खा जाएँगी।
43 The sojourner who is in the midst of thee shall mount up above thee higher and higher, and thou shall come down lower and lower.
४३जो परदेशी तेरे मध्य में रहेगा वह तुझ से बढ़ता जाएगा; और तू आप घटता चला जाएगा।
44 He shall lend to thee, and thou shall not lend to him. He shall be the head, and thou shall be the tail.
४४“वह तुझको उधार देगा, परन्तु तू उसको उधार न दे सकेगा; वह तो सिर और तू पूँछ ठहरेगा।
45 And all these curses shall come upon thee, and shall pursue thee, and overtake thee, till thou be destroyed, because thou hearkened not to the voice of Jehovah thy God, to keep his commandments and his statutes which he commanded thee,
४५तू जो अपने परमेश्वर यहोवा की दी हुई आज्ञाओं और विधियों के मानने को उसकी न सुनेगा, इस कारण ये सब श्राप तुझ पर आ पड़ेंगे, और तेरे पीछे पड़े रहेंगे, और तुझको पकड़ेंगे, और अन्त में तू नष्ट हो जाएगा।
46 and they shall be upon thee for a sign and for a wonder, and upon thy seed forever.
४६और वे तुझ पर और तेरे वंश पर सदा के लिये बने रहकर चिन्ह और चमत्कार ठहरेंगे;
47 Because thou served not Jehovah thy God with joyfulness, and with gladness of heart, by reason of the abundance of all things,
४७“तू जो सब पदार्थ की बहुतायत होने पर भी आनन्द और प्रसन्नता के साथ अपने परमेश्वर यहोवा की सेवा नहीं करेगा,
48 therefore thou shall serve thine enemies that Jehovah shall send against thee, in hunger, and in thirst, and in nakedness, and in want of all things. And he shall put a yoke of iron upon thy neck, until he has destroyed thee.
४८इस कारण तुझको भूखा, प्यासा, नंगा, और सब पदार्थों से रहित होकर अपने उन शत्रुओं की सेवा करनी पड़ेगी जिन्हें यहोवा तेरे विरुद्ध भेजेगा; और जब तक तू नष्ट न हो जाए तब तक वह तेरी गर्दन पर लोहे का जूआ डाल रखेगा।
49 Jehovah will bring a nation against thee from far, from the end of the earth, as the eagle flies, a nation whose tongue thou shall not understand,
४९यहोवा तेरे विरुद्ध दूर से, वरन् पृथ्वी के छोर से वेग से उड़नेवाले उकाब सी एक जाति को चढ़ा लाएगा जिसकी भाषा को तू न समझेगा;
50 a nation of fierce countenance, that shall not regard the person of the old, nor show favor to the young,
५०उस जाति के लोगों का व्यवहार क्रूर होगा, वे न तो बूढ़ों का मुँह देखकर आदर करेंगे, और न बालकों पर दया करेंगे;
51 and shall eat the fruit of thy cattle, and the fruit of thy ground, until thou be destroyed, that also shall not leave thee grain, new wine, or oil, the increase of thy cattle, or the young of thy flock, until they have caused thee to perish.
५१और वे तेरे पशुओं के बच्चे और भूमि की उपज यहाँ तक खा जाएँगे कि तू नष्ट हो जाएगा; और वे तेरे लिये न अन्न, और न नया दाखमधु, और न टटका तेल, और न बछड़े, न मेम्ने छोड़ेंगे, यहाँ तक कि तू नाश हो जाएगा।
52 And they shall besiege thee in all thy gates, until thy high and fortified walls come down, in which thou trusted, throughout all thy land. And they shall besiege thee in all thy gates throughout all thy land, which Jehovah thy God has given thee.
५२और वे तेरे परमेश्वर यहोवा के दिये हुए सारे देश के सब फाटकों के भीतर तुझे घेर रखेंगे; वे तेरे सब फाटकों के भीतर तुझे उस समय तक घेरेंगे, जब तक तेरे सारे देश में तेरी ऊँची-ऊँची और दृढ़ शहरपनाहें जिन पर तू भरोसा करेगा गिर न जाएँ।
53 And thou shall eat the fruit of thine own body, the flesh of thy sons and of thy daughters, whom Jehovah thy God has given thee, in the siege and in the distress with which thine enemies shall distress thee.
५३तब घिर जाने और उस संकट के समय जिसमें तेरे शत्रु तुझको डालेंगे, तू अपने निज जन्माए बेटे-बेटियों का माँस जिन्हें तेरा परमेश्वर यहोवा तुझको देगा खाएगा।
54 The man who is tender among you, and very delicate, his eye shall be evil toward his brother, and toward the wife of his bosom, and toward the remnant of his sons whom he has remaining,
५४और तुझ में जो पुरुष कोमल और अति सुकुमार हो वह भी अपने भाई, और अपनी प्राणप्रिय, और अपने बचे हुए बालकों को क्रूर दृष्टि से देखेगा;
55 so that he will not give to any of them of the flesh of his sons whom he shall eat, because he has nothing left to him, in the siege and in the distress with which thine enemy shall distress thee in all thy gates.
५५और वह उनमें से किसी को भी अपने बालकों के माँस में से जो वह आप खाएगा कुछ न देगा, क्योंकि घिर जाने और उस संकट में, जिसमें तेरे शत्रु तेरे सारे फाटकों के भीतर तुझे घेर डालेंगे, उसके पास कुछ न रहेगा।
56 The tender and delicate woman among you, who would not adventure to set the sole of her foot upon the ground for delicateness and tenderness, her eye shall be evil toward the husband of her bosom, and toward her son, and toward her daughter,
५६और तुझ में जो स्त्री यहाँ तक कोमल और सुकुमार हो कि सुकुमारपन के और कोमलता के मारे भूमि पर पाँव धरते भी डरती हो, वह भी अपने प्राणप्रिय पति, और बेटे, और बेटी को,
57 and toward her young one who comes out from between her feet, and toward her sons whom she shall bear, for she shall eat them secretly for want of all things, in the siege and in the distress with which thine enemy shall distress thee in thy gates.
५७अपनी खेरी, वरन् अपने जने हुए बच्चों को क्रूर दृष्टि से देखेगी, क्योंकि घिर जाने और उस संकट के समय जिसमें तेरे शत्रु तुझे तेरे फाटकों के भीतर घेरकर रखेंगे, वह सब वस्तुओं की घटी के मारे उन्हें छिपके खाएगी।
58 If thou will not observe to do all the words of this law that are written in this book, that thou may fear this glorious and fearful name, JEHOVAH THY GOD,
५८“यदि तू इन व्यवस्था के सारे वचनों का पालन करने में, जो इस पुस्तक में लिखे हैं, चौकसी करके उस आदरणीय और भययोग्य नाम का, जो यहोवा तेरे परमेश्वर का है भय न माने,
59 then Jehovah will make thy calamities extraordinary, and the calamities of thy seed, even great calamities and of long continuance, and severe sicknesses and of long continuance.
५९तो यहोवा तुझको और तेरे वंश को भयानक-भयानक दण्ड देगा, वे दुष्ट और बहुत दिन रहनेवाले रोग और भारी-भारी दण्ड होंगे।
60 And he will bring upon thee again all the diseases of Egypt, which thou were afraid of, and they shall cling to thee.
६०और वह मिस्र के उन सब रोगों को फिर तेरे ऊपर लगा देगा, जिनसे तू भय खाता था; और वे तुझ में लगे रहेंगे।
61 Also every sickness, and every calamity, which is not written in the book of this law, them Jehovah will bring upon thee, until thou be destroyed.
६१और जितने रोग आदि दण्ड इस व्यवस्था की पुस्तक में नहीं लिखे हैं, उन सभी को भी यहोवा तुझको यहाँ तक लगा देगा, कि तेरा सत्यानाश हो जाएगा।
62 And ye shall be left few in number, whereas ye were as the stars of heaven for multitude, because thou did not hearken to the voice of Jehovah thy God.
६२और तू जो अपने परमेश्वर यहोवा की न मानेगा, इस कारण आकाश के तारों के समान अनगिनत होने के बदले तुझ में से थोड़े ही मनुष्य रह जाएँगे।
63 And it shall come to pass, that, as Jehovah rejoiced over you to do you good, and to multiply you, so Jehovah will rejoice over you to cause you to perish, and to destroy you. And ye shall be plucked from off the land where thou go in to possess it.
६३और जैसे अब यहोवा को तुम्हारी भलाई और बढ़ती करने से हर्ष होता है, वैसे ही तब उसको तुम्हारा नाश वरन् सत्यानाश करने से हर्ष होगा; और जिस भूमि के अधिकारी होने को तुम जा रहे हो उस पर से तुम उखाड़े जाओगे।
64 And Jehovah will scatter thee among all peoples, from the one end of the earth even to the other end of the earth. And there thou shall serve other gods, which thou have not known, thou nor thy fathers, even wood and stone.
६४और यहोवा तुझको पृथ्वी के इस छोर से लेकर उस छोर तक के सब देशों के लोगों में तितर-बितर करेगा; और वहाँ रहकर तू अपने और अपने पुरखाओं के अनजाने काठ और पत्थर के दूसरे देवताओं की उपासना करेगा।
65 And among these nations thou shall find no ease, and there shall be no rest for the sole of thy foot, but Jehovah will give thee there a trembling heart, and failing of eyes, and pining of soul.
६५और उन जातियों में तू कभी चैन न पाएगा, और न तेरे पाँव को ठिकाना मिलेगा; क्योंकि वहाँ यहोवा ऐसा करेगा कि तेरा हृदय काँपता रहेगा, और तेरी आँखें धुँधली पड़ जाएँगी, और तेरा मन व्याकुल रहेगा;
66 And thy life shall hang in doubt before thee, and thou shall fear night and day, and shall have no assurance of thy life.
६६और तुझको जीवन का नित्य सन्देह रहेगा; और तू दिन-रात थरथराता रहेगा, और तेरे जीवन का कुछ भरोसा न रहेगा।
67 In the morning thou shall say, Would it were evening! and at evening thou shall say, Would it were morning! for the fear of thy heart which thou shall fear, and for the sight of thine eyes which thou shall see.
६७तेरे मन में जो भय बना रहेगा, और तेरी आँखों को जो कुछ दिखता रहेगा, उसके कारण तू भोर को आह मारकर कहेगा, ‘साँझ कब होगी!’ और साँझ को आह मारकर कहेगा, ‘भोर कब होगा!’
68 And Jehovah will bring thee into Egypt again with ships, by the way of which I said to thee, Thou shall see it no more again. And there ye shall sell yourselves to your enemies for bondmen and for bondwomen, and no man shall buy you.
६८और यहोवा तुझको नावों पर चढ़ाकर मिस्र में उस मार्ग से लौटा देगा, जिसके विषय में मैंने तुझ से कहा था, कि वह फिर तेरे देखने में न आएगा; और वहाँ तुम अपने शत्रुओं के हाथ दास-दासी होने के लिये बिकाऊ तो रहोगे, परन्तु तुम्हारा कोई ग्राहक न होगा।”

< Deuteronomy 28 >