2 صموئيل 22

وَكَلَّمَ دَاوُدُ ٱلرَّبَّ بِكَلَامِ هَذَا ٱلنَّشِيدِ فِي ٱلْيَوْمِ ٱلَّذِي أَنْقَذَهُ فِيهِ ٱلرَّبُّ مِنْ أَيْدِي كُلِّ أَعْدَائِهِ وَمِنْ يَدِ شَاوُلَ، ١ 1
जब ख़ुदावन्द ने दाऊद को उसके सब दुश्मनों और साऊल के हाथ से रिहाई दी तो उसने ख़ुदावन्द के सामने इस मज़मून का हम्द सुनाया।
فَقَالَ: «اَلرَّبُّ صَخْرَتِي وَحِصْنِي وَمُنْقِذِي، ٢ 2
वह कहने लगा, ख़ुदावन्द मेरी चट्टान और मेरा किला' और मेरा छुड़ाने वाला है।
إِلَهُ صَخْرَتِي بِهِ أَحْتَمِي. تُرْسِي وَقَرْنُ خَلَاصِي. مَلْجَإِي وَمَنَاصِي. مُخَلِّصِي، مِنَ ٱلظُّلْمِ تُخَلِّصُنِي. ٣ 3
ख़ुदा मेरी चट्टान है, मैं उसी पर भरोसा रख्खूँगा, वही मेरी ढाल और मेरी नजात का सींग है, मेरा ऊँचा बुर्ज और मेरी पनाह है, मेरे नजात देने वाले! तूही मुझे ज़ुल्म से बचाता है।
أَدْعُو ٱلرَّبَّ ٱلْحَمِيدَ فَأَتَخَلَّصُ مِنْ أَعْدَائِي. ٤ 4
मैं ख़ुदावन्द को जो ता'रीफ़ के लायक़ है पुकारूँगा, यूँ मैं अपने दुश्मनों से बचाया जाऊँगा।
لِأَنَّ أَمْوَاجَ ٱلْمَوْتِ ٱكْتَنَفَتْنِي. سُيُولُ ٱلْهَلَاكِ أَفْزَعَتْنِي. ٥ 5
क्यूँकि मौत की मौजों ने मुझे घेरा, बेदीनी के सैलाबों ने मुझे डराया।
حِبَالُ ٱلْهَاوِيَةِ أَحَاطَتْ بِي. شُرُكُ ٱلْمَوْتِ أَصَابَتْنِي. (Sheol h7585) ٦ 6
पाताल की रस्सियाँ मेरे चारो तरफ़ थीं मौत के फंदे मुझ पर आते थे। (Sheol h7585)
فِي ضِيقِي دَعَوْتُ ٱلرَّبَّ، وَإِلَى إِلَهِي صَرَخْتُ، فَسَمِعَ مِنْ هَيْكَلِهِ صَوْتِي، وَصُرَاخِي دَخَلَ أُذُنَيْهِ. ٧ 7
अपनी मुसीबत में मैंने ख़ुदावन्द को पुकारा, मैं अपने ख़ुदा के सामने चिल्लाया। उसने अपनी हैकल में से मेरी आवाज़ सुनी और मेरी फ़रयाद उसके कान में पहुँची।
فَٱرْتَجَّتِ ٱلْأَرْضُ وَٱرْتَعَشَتْ. أُسُسُ ٱلسَّمَاوَاتِ ٱرْتَعَدَتْ وَٱرْتَجَّتْ، لِأَنَّهُ غَضِبَ. ٨ 8
तब ज़मीन हिल गई और काँप उठी और आसमान की बुनियादों ने जुम्बिश खाई और हिल गयीं, इसलिए कि वह ग़ुस्सा हुआ।
صَعِدَ دُخَانٌ مِنْ أَنْفِهِ، وَنَارٌ مِنْ فَمِهِ أَكَلَتْ. جَمْرٌ ٱشْتَعَلَتْ مِنْهُ. ٩ 9
उसके नथुनों से धुवाँ उठा और उसके मुँह से आग निकल कर भस्म करने लगी, कोयले उससे दहक उठे।
طَأْطَأَ ٱلسَّمَاوَاتِ وَنَزَلَ، وَضَبَابٌ تَحْتَ رِجْلَيْهِ. ١٠ 10
उसने आसमानों को भी झुका दिया और नीचे उतर आया और उसके पाँव तले गहरा अँधेरा था।
رَكِبَ عَلَى كَرُوبٍ، وَطَارَ وَرُئِيَ عَلَى أَجْنِحَةِ ٱلرِّيحِ. ١١ 11
वह करूबी पर सवार होकर उदा और हवा के बाज़ुओं पर दिखाई दिया।
جَعَلَ ٱلظُّلْمَةَ حَوْلَهُ مِظَلَّاتٍ، مِيَاهًا حَاشِكَةً وَظَلَامَ ٱلْغَمَامِ. ١٢ 12
और उसने अपने चारों तरफ़ अँधेरे को और पानी के इज्तिमा'और आसमान के दलदार बादलों को शामियाने बनाया।
مِنَ ٱلشُّعَاعِ قُدَّامَهُ ٱشْتَعَلَتْ جَمْرُ نَارٍ. ١٣ 13
उस झलक से जो उसके आगे आगे थी आग के कोयले सुलग गये।
أَرْعَدَ ٱلرَّبُّ مِنَ ٱلسَّمَاوَاتِ، وَٱلْعَلِيُّ أَعْطَى صَوْتَهُ. ١٤ 14
ख़ुदावन्द आसमान से गरजा और हक़ त'आला ने अपनी आवाज़ सुनाई।
أَرْسَلَ سِهَامًا فَشَتَّتَهُمْ، بَرْقًا فَأَزْعَجَهُمْ. ١٥ 15
उसने तीर चला कर उनको तितर बितर किया, और बिजली से उनको शिकस्त दी।
فَظَهَرَتْ أَعْمَاقُ ٱلْبَحْرِ، وَٱنْكَشَفَتْ أُسُسُ ٱلْمَسْكُونَةِ مِنْ زَجْرِ ٱلرَّبِّ، مِنْ نَسْمَةِ رِيحِ أَنْفِهِ. ١٦ 16
तब ख़ुदावन्द की डॉट से; उसके नथुनों के दम के झोंके से, समुन्दर की गहराई दिखाई देने लगी, और जहान की बुनियादें नमूदार हुईं।
أَرْسَلَ مِنَ ٱلْعُلَى فَأَخَذَنِي، نَشَلَنِي مِنْ مِيَاهٍ كَثِيرَةٍ. ١٧ 17
उसने ऊपर से हाथ बढ़ाकर मुझे थाम लिया, और मुझे बहुत पानी में से खींच कर बाहर निकाला।
أَنْقَذَنِي مِنْ عَدُوِّيَ ٱلْقَوِيِّ، مِنْ مُبْغِضِيَّ لِأَنَّهُمْ أَقْوَى مِنِّي. ١٨ 18
उसने मेरे ताक़तवर दुश्मन और मेरे 'अदावत रखने वालों से, मुझे छुड़ा लिया क्यूँकि वह मेरे लिए निहायत बहादुर थे।
أَصَابُونِي فِي يَوْمِ بَلِيَّتِي، وَكَانَ ٱلرَّبُّ سَنَدِي. ١٩ 19
वह मेरी मुसीबत के दिन मुझ पर आ पड़े, पर ख़ुदावन्द मेरा सहारा था।
أَخْرَجَنِي إِلَى ٱلرَّحْبِ. خَلَّصَنِي لِأَنَّهُ سُرَّ بِي. ٢٠ 20
वह मुझे चौड़ी जगह में निकाल भी लाया, उसने मुझे छुड़ाया, इसलिए कि वह मुझसे ख़ुश था।
يُكَافِئُنِي ٱلرَّبُّ حَسَبَ بِرِّي. حَسَبَ طَهَارَةِ يَدَيَّ يَرُدُّ عَلَيَّ. ٢١ 21
ख़ुदावन्द ने मेरी रास्तबाज़ी के मुवाफ़िक़ मुझे बदला दिया, और मेरे हाथों की पाकीज़गी के मुताबिक़ मुझे बदला दिया।
لِأَنِّي حَفِظْتُ طُرُقَ ٱلرَّبِّ، وَلَمْ أَعْصِ إِلَهِي. ٢٢ 22
क्यूँकि मैं ख़ुदावन्द की राहों पर चलता रहा, और ग़ल्ती से अपने ख़ुदा से अलग न हुआ।
لِأَنَّ جَمِيعَ أَحْكَامِهِ أَمَامِي، وَفَرَائِضُهُ لَا أَحِيدُ عَنْهَا. ٢٣ 23
क्यूँकि उसके सारे फ़ैसले मेरे सामने थे, और मैं उसके क़ानून से अलग न हुआ।
وَأَكُونُ كَامِلًا لَدَيْهِ، وَأَتَحَفَّظُ مِنْ إِثْمِي. ٢٤ 24
मैं उसके सामने कामिल भी रहा, और अपनी बदकारी से बा'ज़ रहा।
فَيَرُدُّ ٱلرَّبُّ عَلَيَّ كَبِرِّي، وَكَطَهَارَتِي أَمَامَ عَيْنَيْهِ. ٢٥ 25
इसीलिए ख़ुदावन्द ने मुझे मेरी रास्तबाज़ी के मुवाफ़िक़ बल्कि मेरी उस पाकीज़गी के मुताबिक़ जो उसकी नज़र के सामने थी बदला दिया।
«مَعَ ٱلرَّحِيمِ تَكُونُ رَحِيمًا. مَعَ ٱلرَّجُلِ ٱلْكَامِلِ تَكُونُ كَامِلًا. ٢٦ 26
रहम दिल के साथ तू रहीम होगा, और कामिल आदमी के साथ कामिल।
مَعَ ٱلطَّاهِرِ تَكُونُ طَاهِرًا، وَمَعَ ٱلْأَعْوَجِ تَكُونُ مُلْتَوِيًا. ٢٧ 27
नेकों के साथ नेक होगा, और टेढों के साथ टेढ़ा।
وَتُخَلِّصُ ٱلشَّعْبَ ٱلْبَائِسَ، وَعَيْنَاكَ عَلَى ٱلْمُتَرَفِّعِينَ فَتَضَعُهُمْ. ٢٨ 28
मुसीबत ज़दा लोगों को तू बचाएगा, लेकिन तेरी आँखें मग़रूरों पर लगी हैं ताकि तू उन्हें नीचा करे।
لِأَنَّكَ أَنْتَ سِرَاجِي يَارَبُّ، وَٱلرَّبُّ يُضِيءُ ظُلْمَتِي. ٢٩ 29
क्यूँकि ऐ ख़ुदावन्द! तू मेरा चराग़ है, और ख़ुदावन्द मेरे अँधेरे को उजाला कर देगा।
لِأَنِّي بِكَ ٱقْتَحَمْتُ جَيْشًا. بِإِلَهِي تَسَوَّرْتُ أَسْوَارًا. ٣٠ 30
क्यूँकि तेरी बदौलत मैं फ़ौज पर जंग करता हूँ, और अपने ख़ुदा की बदौलत दीवार फाँद जाता हूँ।
ٱللهُ طَرِيقُهُ كَامِلٌ، وَقَوْلُ ٱلرَّبِّ نَقِيٌّ. تُرْسٌ هُوَ لِجَمِيعِ ٱلْمُحْتَمِينَ بِهِ. ٣١ 31
लेकिन ख़ुदा की राह कामिल है, ख़ुदावन्द का कलाम ताया हुआ है, वह उन सबकी ढाल है जो उसपर भरोसा रखते हैं।
لِأَنَّهُ مَنْ هُوَ إِلَهٌ غَيْرُ ٱلرَّبِّ؟ وَمَنْ هُوَ صَخْرَةٌ غَيْرُ إِلَهِنَا؟ ٣٢ 32
क्यूँकि ख़ुदावन्द के 'अलावा और कौन ख़ुदा है? और हमारे ख़ुदा को छोड़ कर और कौन चटटान है?
ٱلْإِلَهُ ٱلَّذِي يُعَزِّزُنِي بِٱلْقُوَّةِ، وَيُصَيِّرُ طَرِيقِي كَامِلًا. ٣٣ 33
ख़ुदा मेरा मज़बूत किला' है, वह अपनी राह में कामिल शख़्स की रहनुमाई करता है।
ٱلَّذِي يَجْعَلُ رِجْلَيَّ كَٱلْإِيَّلِ، وَعَلَى مُرْتَفَعَاتِي يُقِيمُنِي ٣٤ 34
वह उसके पाँव हिरनी के से बना देता है, और मुझे मेरी ऊँची जगहों में क़ाईम करता है।
ٱلَّذِي يُعَلِّمُ يَدَيَّ ٱلْقِتَالَ، فَتُحْنَى بِذِرَاعَيَّ قَوْسٌ مِنْ نُحَاسٍ. ٣٥ 35
वह मेरे हाथों को जंग करना सिखाता है, यहाँ तक कि मेरे बाज़ू पीतल की कमान को झुका देते हैं।
وَتَجْعَلُ لِي تُرْسَ خَلَاصِكَ، وَلُطْفُكَ يُعَظِّمُنِي. ٣٦ 36
तूने मुझको अपनी नजात की ढाल भी बख़्शी, और तेरी नरमी ने मुझे बुज़ुर्ग बना दिया।
تُوَسِّعُ خَطْوَاتِي تَحْتِي، فَلَمْ تَتَقَلْقَلْ كَعْبَايَ. ٣٧ 37
तूने मेरे नीचे मेरे क़दम चौड़े कर दिए, और मेरे पाँव नहीं फिसले।
أَلْحَقُ أَعْدَائِي فَأُهْلِكُهُمْ، وَلَا أَرْجِعُ حَتَّى أُفْنِيَهُمْ. ٣٨ 38
मैंने अपने दुश्मनों का पीछा करके उनको हलाक किया, और जब तक वह फ़ना न हो गये मैं वापस नहीं आया।
أُفْنِيهِمْ وَأَسْحَقُهُمْ فَلَا يَقُومُونَ، بَلْ يَسْقُطُونَ تَحْتَ رِجْلَيَّ. ٣٩ 39
मैंने उनको फ़ना कर दिया और ऐसा छेद डाला है कि वह उठ नहीं सकते, बल्कि वह तो मेरे पाँव के नीचे गिरे पड़े हैं।
«تُنَطِّقُنِي قُوَّةً لِلْقِتَالِ، وَتَصْرَعُ ٱلْقَائِمِينَ عَلَيَّ تَحْتِي. ٤٠ 40
क्यूँकि तूने लड़ाई के लिए मुझे ताक़त से तैयार किया, और मेरे मुख़ालिफ़ों को मेरे सामने नीचा किया।
وَتُعْطِينِي أَقْفِيَةَ أَعْدَائِي وَمُبْغِضِيَّ فَأُفْنِيهِمْ. ٤١ 41
तूने मेरे दुश्मनों की पीठ मेरी तरफ़ फेरदी, ताकि मैं अपने 'अदावत रखने वालों को काट डालूँ।
يَتَطَلَّعُونَ فَلَيْسَ مُخَلِّصٌ، إِلَى ٱلرَّبِّ فَلَا يَسْتَجِيبُهُمْ. ٤٢ 42
उन्होंने इन्तिज़ार किया लेकिन कोई न था जो बचाए, बल्कि ख़ुदावन्द का भी इन्तिज़ार किया, लेकिन उसने उनको जवाब न दिया।
فَأَسْحَقُهُمْ كَغُبَارِ ٱلْأَرْضِ. مِثْلَ طِينِ ٱلْأَسْوَاقِ أَدُقُّهُمْ وَأَدُوسُهُمْ. ٤٣ 43
तब मैंने उनको कूट कूट कर ज़मीन की गर्द की तरह कर दिया, मैंने उनको गली कूचों के कीचड़ की तरह रौंद कर चारो तरफ़ फैला दिया।
وَتُنْقِذُنِي مِنْ مُخَاصَمَاتِ شَعْبِي، وَتَحْفَظُنِي رَأْسًا لِلْأُمَمِ. شَعْبٌ لَمْ أَعْرِفْهُ يَتَعَبَّدُ لِي. ٤٤ 44
तूने मुझे मेरी क़ौम के झगड़ों से भी छुड़ाया, तूने मुझे क़ौमों का सरदार होने के लिए रख छोड़ा है, जिस क़ौम से मैं वाक़िफ़ भी नहीं वह मेरी फ़रमा बरदार होगी।
بَنُو ٱلْغُرَبَاءِ يَتَذَلَّلُونَ لِي. مِنْ سَمَاعِ ٱلْأُذُنِ يَسْمَعُونَ لِي. ٤٥ 45
परदेसी मेरे ताबे' हो जायेंगे, वह मेरा नाम सुनते ही मेरी फ़रमाबर्दारी करेंगे।
بَنُو ٱلْغُرَبَاءِ يَبْلَوْنَ وَيَزْحَفُونَ مِنْ حُصُونِهِمْ. ٤٦ 46
परदेसी मुरझा जायेंगे और अपने किलों'से थरथराते हुए निकलेंगे।
حَيٌّ هُوَ ٱلرَّبُّ، وَمُبَارَكٌ صَخْرَتِي، وَمُرْتَفَعٌ إِلَهُ صَخْرَةِ خَلَاصِي. ٤٧ 47
ख़ुदावन्द ज़िन्दा है, मेरी चटटान मुबारक हो! और ख़ुदा मेरे नजात की चटटान मुम्ताज़ हो!
ٱلْإِلَهُ ٱلْمُنْتَقِمُ لِي، وَٱلْمُخْضِعُ شُعُوبًا تَحْتِي، ٤٨ 48
वही ख़ुदा जो मेरा बदला लेता है, और उम्मतों को मेरे ताबे' कर देता है।
وَٱلَّذِي يُخْرِجُنِي مِنْ بَيْنِ أَعْدَائِي، وَيَرْفَعُنِي فَوْقَ ٱلْقَائِمِينَ عَلَيَّ، وَيُنْقِذُنِي مِنْ رَجُلِ ٱلظُّلْمِ. ٤٩ 49
और मुझे मेरे दुश्मनों के बीच से निकालता है, हाँ तू मुझे मेरे मुख़ालिफ़ों पर सरफ़राज़ करता है, तू मुझे टेढ़े आदमियों से रिहाई देता है।
لِذَلِكَ أَحْمَدُكَ يَارَبُّ فِي ٱلْأُمَمِ، وَلِٱسْمِكَ أُرَنِّمُ. ٥٠ 50
इसलिए ऐ ख़ुदावन्द! मैं क़ौमों के बीच तेरी शुक्रगुज़ारी और तेरे नाम की मदह सराई करूँगा।
بُرْجُ خَلَاصٍ لِمَلِكِهِ، وَٱلصَّانِعُ رَحْمَةً لِمَسِيحِهِ، لِدَاوُدَ وَنَسْلِهِ إِلَى ٱلْأَبَدِ». ٥١ 51
वह अपने बादशाह को बड़ी नजात 'इनायत करता है, और अपने ममसूह दाऊद और उसकी नसल पर हमेशा शफ़क़त करता है।