1 صموئيل 17

وَجَمَعَ ٱلْفِلِسْطِينِيُّونَ جُيُوشَهُمْ لِلْحَرْبِ، فَٱجْتَمَعُوا فِي سُوكُوهَ ٱلَّتِي لِيَهُوذَا، وَنَزَلُوا بَيْنَ سُوكُوهَ وَعَزِيقَةَ فِي أَفَسِ دَمِّيمَ. ١ 1
फिर फ़िलिस्तियों ने जंग के लिए अपनी फ़ौजें जमा' कीं, और यहूदाह के शहर शोको में इकट्ठे हुए और शोक़े और 'अजीक़ा के बीच अफ़सदम्मीम में ख़ैमाज़न हुए।
وَٱجْتَمَعَ شَاوُلُ وَرِجَالُ إِسْرَائِيلَ وَنَزَلُوا فِي وَادِي ٱلْبُطْمِ، وَٱصْطَفُّوا لِلْحَرْبِ لِلِقَاءِ ٱلْفِلِسْطِينِيِّينَ. ٢ 2
और साऊल और इस्राईल के लोगों ने जमा' होकर एला की वादी में डेरे डाले और लड़ाई के लिए फ़िलिस्तियों के मुक़ाबिल सफ़ आराई की।
وَكَانَ ٱلْفِلِسْطِينِيُّونَ وُقُوفًا عَلَى جَبَلٍ مِنْ هُنَا، وَإِسْرَائِيلُ وُقُوفًا عَلَى جَبَلٍ مِنْ هُنَاكَ، وَٱلْوَادِي بَيْنَهُمْ. ٣ 3
और एक तरफ़ के पहाड़ पर फ़िलिस्ती और दूसरी तरफ़ के पहाड़ पर बनी इस्राईल खड़े हुए और इन दोनों के बीच वादी थी।
فَخَرَجَ رَجُلٌ مُبَارِزٌ مِنْ جُيُوشِ ٱلْفِلِسْطِينِيِّينَ ٱسْمُهُ جُلْيَاتُ، مِنْ جَتَّ، طُولُهُ سِتُّ أَذْرُعٍ وَشِبْرٌ، ٤ 4
और फ़िलिस्तियों के लश्कर से एक पहलवान निकला जिसका नाम जाती जूलियत था, उसका क़द छ हाथ और एक बालिश्त था।
وَعَلَى رَأْسِهِ خُوذَةٌ مِنْ نُحَاسٍ، وَكَانَ لَابِسًا دِرْعًا حَرْشَفِيًّا، وَوَزْنَ ٱلْدِّرْعِ خَمْسَةُ آلَافِ شَاقِلِ نُحَاسٍ، ٥ 5
और उसके सर पर पीतल का टोपा था, और वह पीतल ही की ज़िरह पहने हुए था जो तोल में पाँच हज़ार पीतल की मिस्क़ाल के बराबर थी।
وَجُرْمُوقَا نُحَاسٍ عَلَى رِجْلَيْهِ، وَمِزْرَاقُ نُحَاسٍ بَيْنَ كَتِفَيْهِ، ٦ 6
और उसकी टाँगों पर पीतल के दो साकपोश थे और उसके दोनों शानों के बीच पीतल की बरछी थी।
وَقَنَاةُ رُمْحِهِ كَنَوْلِ ٱلنَّسَّاجِينَ، وَسِنَانُ رُمْحِهِ سِتُّ مِئَةِ شَاقِلِ حَدِيدٍ، وَحَامِلُ ٱلتُّرْسِ كَانَ يَمْشِي قُدَّامَهُ. ٧ 7
और उसके भाले की छड़ ऐसी थी जैसे जुलाहे का शहतीर और उसके नेज़े का फ़ल छ: सौ मिस्क़ाल लोहे का था और एक शख़्स ढाल लिए हुए उसके आगे आगे चलता था।
فَوَقَفَ وَنَادَى صُفُوفَ إِسْرَائِيلَ وَقَالَ لَهُمْ: «لِمَاذَا تَخْرُجُونَ لِتَصْطَفُّوا لِلْحَرْبِ؟ أَمَا أَنَا ٱلْفِلِسْطِينِيُّ، وَأَنْتُمْ عَبِيدٌ لِشَاوُلَ؟ ٱخْتَارُوا لِأَنْفُسِكُمْ رَجُلًا وَلْيَنْزِلْ إِلَيَّ. ٨ 8
वह खड़ा हुआ, और इस्राईल के लश्करों को पुकार कर उन से कहने लगा कि तुमने आकर जंग के लिए क्यूँ सफ आराई की? क्या मैं फ़िलिस्ती नहीं और तुम साऊल के ख़ादिम नहीं? इसलिए अपने लिए किसी शख़्स को चुनो जो मेरे पास उतर आए।
فَإِنْ قَدَرَ أَنْ يُحَارِبَنِي وَيَقْتُلَنِي نَصِيرُ لَكُمْ عَبِيدًا، وَإِنْ قَدَرْتُ أَنَا عَلَيْهِ وَقَتَلْتُهُ تَصِيرُونَ أَنْتُمْ لَنَا عَبِيدًا وَتَخْدِمُونَنَا». ٩ 9
अगर वह मुझे से लड़ सके और मुझे क़त्ल कर डाले तो हम तुम्हारे ख़ादिम हो जाएँगे लेकिन अगर मैं उस पर ग़ालिब आऊँ और उसे क़त्ल कर डालूँ तो तुम हमारे ख़ादिम हो जाना और हमारी ख़िदमत करना।
وَقَالَ ٱلْفِلِسْطِينِيُّ: «أَنَا عَيَّرْتُ صُفُوفَ إِسْرَائِيلَ هَذَا ٱلْيَوْمَ. أَعْطُونِي رَجُلًا فَنَتَحَارَبَ مَعًا». ١٠ 10
फिर उस फ़िलिस्ती ने कहा कि मैं आज के दिन इस्राईली फ़ौजों की बे'इज़्ज़ती करता हूँ कोई जवान निकालो ताकि हम लड़ें।
وَلَمَّا سَمِعَ شَاوُلُ وَجَمِيعُ إِسْرَائِيلَ كَلَامَ ٱلْفِلِسْطِينِيِّ هَذَا ٱرْتَاعُوا وَخَافُوا جِدًّا. ١١ 11
जब साऊल और सब इस्राईलियों ने उस फ़िलिस्ती की बातें सुनीं, तो परेशान हुए और बहुत डर गए।
وَدَاوُدُ هُوَ ٱبْنُ ذَلِكَ ٱلرَّجُلِ ٱلْأَفْرَاتِيِّ مِنْ بَيْتِ لَحْمِ يَهُوذَا ٱلَّذِي ٱسْمُهُ يَسَّى وَلَهُ ثَمَانِيَةُ بَنِينَ. وَكَانَ ٱلرَّجُلُ فِي أَيَّامِ شَاوُلَ قَدْ شَاخَ وَكَبُرَ بَيْنَ ٱلنَّاسِ. ١٢ 12
और दाऊद बैतल हम यहूदाह के उस इफ़्राती आदमी का बेटा था जिसका नाम यस्सी था, उसके आठ बेटे थे और वह ख़ुद साऊल के ज़माना के लोगों के बीच बुड्ढा और उम्र दराज़ था।
وَذَهَبَ بَنُو يَسَّى ٱلثَّلَاثَةُ ٱلْكِبَارُ وَتَبِعُوا شَاوُلَ إِلَى ٱلْحَرْبِ. وَأَسْمَاءُ بَنِيهِ ٱلثَّلَاثَةِ ٱلَّذِينَ ذَهَبُوا إِلَى ٱلْحَرْبِ: أَلِيآبُ ٱلْبِكْرُ، وَأَبِينَادَابُ ثَانِيهِ، وَشَمَّةُ ثَالِثُهُمَا. ١٣ 13
और यस्सी के तीन बड़े बेटे साऊल के पीछे पीछे जंग में गए थे और उसके तीनों बेटों के नाम जो जंग में गए थे यह थे इलियाब जो पहलौठा था, और दूसरा अबीनदाब और तीसरा सम्मा।
وَدَاوُدُ هُوَ ٱلصَّغِيرُ. وَٱلثَّلَاثَةُ ٱلْكِبَارُ ذَهَبُوا وَرَاءَ شَاوُلَ. ١٤ 14
और दाऊद सबसे छोटा था और तीनों बड़े बेटे साऊल के पीछे पीछे थे।
وَأَمَّا دَاوُدُ فَكَانَ يَذْهَبُ وَيَرْجِعُ مِنْ عِنْدِ شَاوُلَ لِيَرْعَى غَنَمَ أَبِيهِ فِي بَيْتِ لَحْمٍ. ١٥ 15
और दाऊद बैतलहम में अपने बाप की भेड़ बकरयाँ चराने को साऊल के पास से आया जाया करता था।
وَكَانَ ٱلْفِلِسْطِينِيُّ يَتَقَدَّمُ وَيَقِفُ صَبَاحًا وَمَسَاءً أَرْبَعِينَ يَوْمًا. ١٦ 16
और वह फ़िलिस्ती सुबह और शाम नज़दीक आता और चालिस दिन तक निकल कर आता रहा।
فَقَالَ يَسَّى لِدَاوُدَ ٱبْنِهِ: «خُذْ لِإِخْوَتِكَ إِيفَةً مِنْ هَذَا ٱلْفَرِيكِ، وَهَذِهِ ٱلْعَشَرَ ٱلْخُبْزَاتِ وَٱرْكُضْ إِلَى ٱلْمَحَلَّةِ إِلَى إِخْوَتِكَ. ١٧ 17
और यस्सी ने अपने बेटे दाऊद से कहा कि “इस भुने अनाज में से एक ऐफ़ा और यह दस रोटियाँ अपने भाइयों के लिए लेकर इनको जल्द लश्कर गाह, में अपने भाइयों के पास पहुचा दे।
وَهَذِهِ ٱلْعَشَرَ ٱلْقِطْعَاتِ مِنَ ٱلْجُبْنِ قَدِّمْهَا لِرَئِيسِ ٱلْأَلْفِ، وَٱفْتَقِدْ سَلَامَةَ إِخْوَتِكَ وَخُذْ مِنْهُمْ عُرْبُونًا». ١٨ 18
और उनके हज़ारी सरदार के पास पनीर की यह दस टिकियाँ लेजा और देख कि तेरे भाइयों का क्या हाल है, और उनकी कुछ निशानी ले आ।”
وَكَانَ شَاوُلُ وَهُمْ وَجَمِيعُ رِجَالِ إِسْرَائِيلَ فِي وَادِي ٱلْبُطْمِ يُحَارِبُونَ ٱلْفِلِسْطِينِيِّينَ. ١٩ 19
और साऊल और वह भाई और सब इस्राईली जवान एला की वादी में फ़िलिस्तियों से लड़ रहे थे।
فَبَكَّرَ دَاوُدُ صَبَاحًا وَتَرَكَ ٱلْغَنَمَ مَعَ حَارِسٍ، وَحَمَّلَ وَذَهَبَ كَمَا أَمَرَهُ يَسَّى، وَأَتَى إِلَى ٱلْمِتْرَاسِ، وَٱلْجَيْشُ خَارِجٌ إِلَى ٱلِٱصْطِفَافِ وَهَتَفُوا لِلْحَرْبِ. ٢٠ 20
और दाऊद सुबह को सवेरे उठा, और भेड़ बकरियों को एक रखवाले के पास छोड़ कर यस्सी के हुक्म के मुताबिक़ सब कुछ लेकर रवाना हुआ, और जब वह लश्कर जो लड़ने जा रहा था, जंग के लिए ललकार रहा था, उस वक़्त वह छकड़ों के पड़ाव में पहुँचा।
وَٱصْطَفَّ إِسْرَائِيلُ وَٱلْفِلِسْطِينِيُّونَ صَفًّا مُقَابِلَ صَفٍّ. ٢١ 21
और इस्राईलियों और फ़िलिस्तियों ने अपने — अपने लश्कर को आमने सामने करके सफ़ आराई की।
فَتَرَكَ دَاوُدُ ٱلْأَمْتِعَةَ ٱلَّتِي مَعَهُ بِيَدِ حَافِظِ ٱلْأَمْتِعَةِ، وَرَكَضَ إِلَى ٱلصَّفِّ وَأَتَى وَسَأَلَ عَنْ سَلَامَةِ إِخْوَتِهِ. ٢٢ 22
और दाऊद अपना सामान असबाब के निगहबान के हाथ में छोड़ कर आप लश्कर में दौड़ गया और जाकर अपने भाइयों से ख़ैर — ओ — 'आफ़ियत पूछी।
وَفِيمَا هُوَ يُكَلِّمُهُمْ إِذَا بِرَجُلٍ مُبَارِزٍ ٱسْمُهُ جُلْيَاتُ ٱلْفِلِسْطِينِيُّ مِنْ جَتَّ، صَاعِدٌ مِنْ صُفُوفِ ٱلْفِلِسْطِينِيِّينَ وَتَكَلَّمَ بِمِثْلِ هَذَا ٱلْكَلَامِ، فَسَمِعَ دَاوُدُ. ٢٣ 23
और वह उनसे बातें करता ही था कि देखो वह पहलवान जात का फ़िलिस्ती जिसका नाम जूलियत था फ़िलिस्ती सफ़ों में से निकला और उसने फिर वैसी ही बातें कहीं और दाऊद ने उनको सुना।
وَجَمِيعُ رِجَالِ إِسْرَائِيلَ لَمَّا رَأَوْا ٱلرَّجُلَ هَرَبُوا مِنْهُ وَخَافُوا جِدًّا. ٢٤ 24
और सब इस्राईली जवान उस शख़्स को देख कर उसके सामने से भागे और बहुत डर गए।
فَقَالَ رِجَالُ إِسْرَائِيلَ: «أَرَأَيْتُمْ هَذَا ٱلرَّجُلَ ٱلصَّاعِدَ؟ لِيُعَيِّرَ إِسْرَائِيلَ هُوَ صَاعِدٍ! فَيَكُونُ أَنَّ ٱلرَّجُلَ ٱلَّذِي يَقْتُلُهُ يُغْنِيهِ ٱلْمَلِكُ غِنًى جَزِيلًا، وَيُعْطِيهِ ابِنْتَهُ، وَيَجْعَلُ بَيْتَ أَبِيهِ حُرًّا فِي إِسْرَائِيلَ». ٢٥ 25
तब इस्राईली जवान ऐसा कहने लगे, “तुम इस आदमी को जो निकला है देखते हो? यक़ीनन यह इस्राईल की बे'इज़्ज़ती करने को आया है, इसलिए जो कोई उसको मार डाले उसे बादशाह बड़ी दौलत से माला माल करेगा और अपनी बेटी उसे ब्याह देगा, और उसके बाप के घराने को इस्राईल के बीच आज़ाद कर देगा।”
فَكَلَّمَ دَاوُدُ ٱلرِّجَالَ ٱلْوَاقِفِينَ مَعَهُ قَائِلًا: «مَاذَا يُفْعَلُ لِلرَّجُلِ ٱلَّذِي يَقْتُلُ ذَلِكَ ٱلْفِلِسْطِينِيَّ، وَيُزِيلُ ٱلْعَارَ عَنْ إِسْرَائِيلَ؟ لِأَنَّهُ مَنْ هُوَ هَذَا ٱلْفِلِسْطِينِيُّ ٱلْأَغْلَفُ حَتَّى يُعَيِّرَ صُفُوفَ ٱللهِ ٱلْحَيِّ؟» ٢٦ 26
और दाऊद ने उन लोगों से जो उसके पास खड़े थे पूछा कि जो शख़्स इस फ़िलिस्ती को मार कर यह नंग इस्राईल से दूर करे उस से क्या सुलूक किया जाएगा? क्यूँकि यह ना मख्तून फ़िलिस्ती होता कौन है कि वह जिंदा ख़ुदा की फ़ौजों की बे'इज़्ज़ती करे?
فَكَلَّمَهُ ٱلشَّعْبُ بِمِثْلِ هَذَا ٱلْكَلَامِ قَائِلِينَ: «كَذَا يُفْعَلُ لِلرَّجُلِ ٱلَّذِي يَقْتُلُهُ». ٢٧ 27
और लोगों ने उसे यही जवाब दिया कि उस शख़्स से जो उसे मार डाले यह सुलूक किया जाएगा।
وَسَمِعَ أَخُوهُ ٱلْأَكْبَرُ أَلِيآبُ كَلَامَهُ مَعَ ٱلرِّجَالِ، فَحَمِيَ غَضَبُ أَلِيآبَ عَلَى دَاوُدَ وَقَالَ: «لِمَاذَا نَزَلْتَ؟ وَعَلَى مَنْ تَرَكْتَ تِلْكَ ٱلْغُنَيْمَاتِ ٱلْقَلِيلَةَ فِي ٱلْبَرِّيَّةِ؟ أَنَا عَلِمْتُ كِبْرِيَاءَكَ وَشَرَّ قَلْبِكَ، لِأَنَّكَ إِنَّمَا نَزَلْتَ لِكَيْ تَرَى ٱلْحَرْبَ». ٢٨ 28
और उसके सब से बड़े भाई इलियाब ने उसकी बातों को जो वह लोगों से करता था सुना और इलयाब का ग़ुस्सा दाऊद पर भड़का और वह कहने लगा, “तू यहाँ क्यूँ आया है? और वह थोड़ी सी भेड़ बकरियाँ तूने जंगल में किस के पास छोड़ीं? मैं तेरे घमंड और तेरे दिल की शरारत से वाक़िफ़ हूँ, तु लड़ाई देखने आया है।”
فَقَالَ دَاوُدُ: «مَاذَا عَمِلْتُ ٱلْآنَ؟ أَمَا هُوَ كَلَامٌ؟». ٢٩ 29
दाऊद ने कहा, “मैंने अब क्या किया? क्या बात ही नहीं हो रही है?”
وَتَحَوَّلَ مِنْ عِنْدِهِ نَحْوَ آخَرَ، وَتَكَلَّمَ بِمِثْلِ هَذَا ٱلْكَلَامِ، فَرَدَّ لَهُ ٱلشَّعْبُ جَوَابًا كَٱلْجَوَابِ ٱلْأَوَّلِ. ٣٠ 30
और वह उसके पास से फिर कर दूसरे की तरफ़ गया और वैसी ही बातें करने लगा और लोगों ने उसे फिर पहले की तरह जवाब दिया।
وَسُمِعَ ٱلْكَلَامُ ٱلَّذِي تَكَلَّمَ بِهِ دَاوُدُ وَأَخْبَرُوا بِهِ أَمَامَ شَاوُلَ، فَٱسْتَحْضَرَهُ. ٣١ 31
और जब वह बातें जो दाऊद ने कहीं सुनने में आईं तो उन्होंने साऊल के आगे उनका ज़िक्र किया और उसने उसे बुला भेजा।
فَقَالَ دَاوُدُ لِشَاوُلَ: «لَا يَسْقُطْ قَلْبُ أَحَدٍ بِسَبَبِهِ. عَبْدُكَ يَذْهَبُ وَيُحَارِبُ هَذَا ٱلْفِلِسْطِينِيَّ». ٣٢ 32
और दाऊद ने साऊल से कहा कि उस शख़्स की वजह से किसी का दिल न घबराए, तेरा ख़ादिम जाकर उस फ़िलिस्ती से लड़ेगा।
فَقَالَ شَاوُلُ لِدَاوُدَ: «لَا تَسْتَطِيعُ أَنْ تَذْهَبَ إِلَى هَذَا ٱلْفِلِسْطِينِيِّ لِتُحَارِبَهُ لِأَنَّكَ غُلَامٌ وَهُوَ رَجُلُ حَرْبٍ مُنْذُ صِبَاهُ». ٣٣ 33
साऊल ने दाऊद से कहा कि तू इस क़ाबिल नहीं कि उस फ़िलिस्ती से लड़ने को उसके सामने जाए; क्यूँकि तू महज़ लड़का है और वह अपने बचपन से जंगी जवान है।
فَقَالَ دَاوُدُ لِشَاوُلَ: «كَانَ عَبْدُكَ يَرْعَى لِأَبِيهِ غَنَمًا، فَجَاءَ أَسَدٌ مَعَ دُبٍّ وَأَخَذَ شَاةً مِنَ ٱلْقَطِيعِ، ٣٤ 34
तब दाऊद ने साऊल को जवाब दिया कि तेरा ख़ादिम अपने बाप की भेड़ बकरियाँ चराता था और जब कभी कोई शेर या रीछ आकर झुंड में से कोई बर्रा उठा ले जाता।
فَخَرَجْتُ وَرَاءَهُ وَقَتَلْتُهُ وَأَنْقَذْتُهَا مِنْ فِيهِ، وَلَمَّا قَامَ عَلَيَّ أَمْسَكْتُهُ مِنْ ذَقْنِهِ وَضَرَبْتُهُ فَقَتَلْتُهُ. ٣٥ 35
तो मैं उसके पीछे पीछे जाकर उसे मारता और उसे उसके मुँह से छुड़ाता था और जब वह मुझ पर झपटता तो मैं उसकी दाढ़ी पकड़ कर उसे मारता और हलाक कर देता था।
قَتَلَ عَبْدُكَ ٱلْأَسَدَ وَٱلدُّبَّ جَمِيعًا. وَهَذَا ٱلْفِلِسْطِينِيُّ ٱلْأَغْلَفُ يَكُونُ كَوَاحِدٍ مِنْهُمَا، لِأَنَّهُ قَدْ عَيَّرَ صُفُوفَ ٱللهِ ٱلْحَيِّ». ٣٦ 36
तेरे ख़ादिम ने शेर और रीछ दोनों को जान से मारा इसलिए यह नामख़तून फ़िलिस्ती उन में से एक की तरह होगा, इसलिए कि उसने ज़िन्दा ख़ुदा की फ़ौजों की बे'इज़्ज़ती की है।
وَقَالَ دَاوُدُ: «ٱلرَّبُّ ٱلَّذِي أَنْقَذَنِي مِنْ يَدِ ٱلْأَسَدِ وَمِنْ يَدِ ٱلدُّبِّ هُوَ يُنْقِذُنِي مِنْ يَدِ هَذَا ٱلْفِلِسْطِينِيِّ». فَقَالَ شَاوُلُ لِدَاوُدَ: «ٱذْهَبْ وَلْيَكُنِ ٱلرَّبُّ مَعَكَ». ٣٧ 37
फिर दाऊद ने कहा, “ख़ुदावन्द ने मुझे शेर और रीछ के पंजे से बचाया, वही मुझको इस फ़िलिस्ती के हाथ से बचाएगा।” साऊल ने दाऊद से कहा, “जा ख़ुदावन्द तेरे साथ रहे।”
وَأَلْبَسَ شَاوُلُ دَاوُدَ ثِيَابَهُ، وَجَعَلَ خُوذَةً مِنْ نُحَاسٍ عَلَى رَأْسِهِ، وَأَلْبَسَهُ دِرْعًا. ٣٨ 38
तब साऊल ने अपने कपड़े दाऊद को पहनाए, और पीतल का टोप उसके सर पर रख्खा और उसे ज़िरह भी पहनाई।
فَتَقَلَّدَ دَاوُدُ بِسَيْفِهِ فَوْقَ ثِيَابِهِ وَعَزَمَ أَنْ يَمْشِيَ، لِأَنَّهُ لَمْ يَكُنْ قَدْ جَرَّبَ. فَقَالَ دَاوُدُ لِشَاوُلَ: «لَا أَقْدِرُ أَنْ أَمْشِيَ بِهَذِهِ، لِأَنِّي لَمْ أُجَرِّبْهَا». وَنَزَعَهَا دَاوُدُ عَنْهُ. ٣٩ 39
और दाऊद ने उसकी तलवार अपने कपड़ों पर कस ली और चलने की कोशिश की क्यूँकि उसने इनको आजमाया नहीं था, तब दाऊद ने साऊल से कहा, “मैं इनको पहन कर चल नहीं सकता क्यूँकि मैंने इनको आजमाया नहीं है।” इसलिए दाऊद ने उन सबको उतार दिया।
وَأَخَذَ عَصَاهُ بِيَدِهِ، وَٱنْتَخَبَ لَهُ خَمْسَةَ حِجَارَةٍ مُلْسٍ مِنَ ٱلْوَادِي وَجَعَلَهَا فِي كِنْفِ ٱلرُّعَاةِ ٱلَّذِي لَهُ، أَيْ فِي ٱلْجِرَابِ، وَمِقْلَاعَهُ بِيَدِهِ وَتَقَدَّمَ نَحْوَ ٱلْفِلِسْطِينِيِّ. ٤٠ 40
और उसने अपनी लाठी अपने हाथ में ली, और उस नाला से पाँच चिकने — चिकने पत्थर अपने वास्ते चुन कर उनको चरवाहे के थैले में जो उसके पास था, या'नी झोले में डाल लिया, और उसका गोफ़न उसके हाथ में था फिर वह फ़िलिस्ती के नज़दीक चला।
وَذَهَبَ ٱلْفِلِسْطِينِيُّ ذِاهِبًا وَٱقْتَرَبَ إِلَى دَاوُدَ وَٱلْرَّجُلُ حَامِلُ ٱلتُّرْسِ أَمَامَهُ. ٤١ 41
और वह फ़िलिस्ती बढ़ा, और दाऊद के नज़दीक़ आया और उसके आगे — आगे उसका सिपर बरदार था।
وَلَمَّا نَظَرَ ٱلْفِلِسْطِينِيُّ وَرَأَى دَاوُدَ ٱسْتَحْقَرَهُ لِأَنَّهُ كَانَ غُلَامًا وَأَشْقَرَ جَمِيلَ ٱلْمَنْظَرِ. ٤٢ 42
और जब उस फ़िलिस्ती ने इधर उधर निगाह की और दाऊद को देखा तो उसे नाचीज़ जाना क्यूँकि वह महज़ लड़का था, और सुर्ख़रु और नाज़ुक चेहरे का था।
فَقَالَ ٱلْفِلِسْطِينِيُّ لِدَاوُدَ: «أَلَعَلِّي أَنَا كَلْبٌ حَتَّى أَنَّكَ تَأْتِي إِلَيَّ بِعِصِيٍّ؟». وَلَعَنَ ٱلْفِلِسْطِينِيُّ دَاوُدَ بِآلِهَتِهِ. ٤٣ 43
तब फ़िलिस्ती ने दाऊद से कहा, “क्या मैं कुत्ता हूँ, जो तू लाठी लेकर मेरे पास आता है?” और उस फ़िलिस्ती ने अपने मा'बूदों का नाम लेकर दाऊद पर ला'नत की।
وَقَالَ ٱلْفِلِسْطِينِيُّ لِدَاوُدَ: «تَعَالَ إِلَيَّ فَأُعْطِيَ لَحْمَكَ لِطُيُورِ ٱلسَّمَاءِ وَوُحُوشِ ٱلْبَرِّيَّةِ». ٤٤ 44
और उस फ़िलिस्ती ने दाऊद से कहा, “तू मेरे पास आ, और मैं तेरा गोश्त हवाई परिंदों और जंगली जानवरों को दूँगा।”
فَقَالَ دَاوُدُ لِلْفِلِسْطِينِيِّ: «أَنْتَ تَأْتِي إِلَيَّ بِسَيْفٍ وَبِرُمْحٍ وَبِتُرْسٍ، وَأَنَا آتِي إِلَيْكَ بِٱسْمِ رَبِّ ٱلْجُنُودِ إِلَهِ صُفُوفِ إِسْرَائِيلَ ٱلَّذِينَ عَيَّرْتَهُمْ. ٤٥ 45
और दाऊद ने उस फ़िलिस्ती से कहा कि “तू तलवार भाला और बरछी लिए हुए मेरे पास आता है, लेकिन मैं रब्ब — उल — अफ़वाज के नाम से जो इस्राईल के लश्करों का ख़ुदा है, जिसकी तूने बे'इज़्ज़ती की है तेरे पास आता हूँ।
هَذَا ٱلْيَوْمَ يَحْبِسُكَ ٱلرَّبُّ فِي يَدِي، فَأَقْتُلُكَ وَأَقْطَعُ رَأْسَكَ. وَأُعْطِي جُثَثَ جَيْشِ ٱلْفِلِسْطِينِيِّينَ هَذَا ٱلْيَوْمَ لِطُيُورِ ٱلسَّمَاءِ وَحَيَوَانَاتِ ٱلْأَرْضِ، فَتَعْلَمُ كُلُّ ٱلْأَرْضِ أَنَّهُ يُوجَدُ إِلَهٌ لِإِسْرَائِيلَ. ٤٦ 46
और आज ही के दिन ख़ुदावन्द तुझको मेरे हाथ में कर देगा, और मैं तुझको मार कर तेरा सर तुझ पर से उतार लूँगा और मैं आज के दिन फ़िलिस्तियों के लश्कर की लाशें हवाई परिंदों और ज़मीन के जंगली जानवरों को दूँगा ताकि दुनिया जान ले कि इस्राईल में एक ख़ुदा है।
وَتَعْلَمُ هَذِهِ ٱلْجَمَاعَةُ كُلُّهَا أَنَّهُ لَيْسَ بِسَيْفٍ وَلَا بِرُمْحٍ يُخَلِّصُ ٱلرَّبُّ، لِأَنَّ ٱلْحَرْبَ لِلرَّبِّ وَهُوَ يَدْفَعُكُمْ لِيَدِنَا». ٤٧ 47
और यह सारी जमा'अत जान ले कि ख़ुदावन्द तलवार और भाले के ज़रिए' से नहीं बचाता इसलिए कि जंग तो ख़ुदावन्द की है, और वही तुमको हमारे हाथ में कर देगा।”
وَكَانَ لَمَّا قَامَ ٱلْفِلِسْطِينِيُّ وَذَهَبَ وَتَقدَّمَ لِلِقَاءِ دَاودَ أَنَّ دَاوُدَ أَسْرَعَ وَرَكَضَ نَحْوَ ٱلصَّفِّ لِلِقَاءِ ٱلْفِلِسْطِينِيِّ. ٤٨ 48
और ऐसा हुआ, कि जब वह फ़िलिस्ती उठा, और बढ़ कर दाऊद के मुक़ाबिला के लिए नज़दीक आया, तो दाऊद ने जल्दी की और लश्कर की तरफ़ उस फ़िलिस्ती से मुक़ाबिला करने को दौड़ा।
وَمَدَّ دَاوُدُ يَدَهُ إِلَى ٱلْكِنْفِ وَأَخَذَ مِنْهُ حَجَرًا وَرَمَاهُ بِٱلْمِقْلَاعِ، وَضَرَبَ ٱلْفِلِسْطِينِيَّ فِي جِبْهَتِهِ، فَٱرْتَزَّ ٱلْحَجَرُ فِي جِبْهَتِهِ، وَسَقَطَ عَلَى وَجْهِهِ إِلَى ٱلْأَرْضِ. ٤٩ 49
और दाऊद ने अपने थैले में अपना हाथ डाला और उस में से एक पत्थर लिया और गोफ़न में रख कर उस फ़िलिस्ती के माथे पर मारा और वह पत्थर उसके माथे के अंदर घुस गया और वह ज़मीन पर मुँह के बल गिर पड़ा।
فَتَمَكَّنَ دَاوُدُ مِنَ ٱلْفِلِسْطِينِيِّ بِٱلْمِقْلَاعِ وَٱلْحَجَرِ، وَضَرَبَ ٱلْفِلِسْطِينِيَّ وَقَتَلَهُ. وَلَمْ يَكُنْ سَيْفٌ بِيَدِ دَاوُدَ. ٥٠ 50
इसलिए दाऊद उस गोफ़न और एक पत्थर से उस फ़िलिस्ती पर ग़ालिब आया और उस फ़िलिस्ती को मारा और क़त्ल किया और दाऊद के हाथ में तलवार न थी।
فَرَكَضَ دَاوُدُ وَوَقَفَ عَلَى ٱلْفِلِسْطِينِيِّ وَأَخَذَ سَيْفَهُ وَٱخْتَرَطَهُ مِنْ غِمْدِهِ وَقَتَلَهُ وَقَطَعَ بِهِ رَأْسَهُ. فَلَمَّا رَأَى ٱلْفِلِسْطِينِيُّونَ أَنَّ جَبَّارَهُمْ قَدْ مَاتَ هَرَبُوا. ٥١ 51
और दाऊद दौड़ कर उस फ़िलिस्ती के ऊपर खड़ा हो गया, और उसकी तलवार पकड़ कर मियाँन से खींची और उसे क़त्ल किया और उसी से उसका सर काट डाला और फ़िलिस्तियों ने जो देखा कि उनका पहलवान मारा गया तो वह भागे।
فَقَامَ رِجَالُ إِسْرَائِيلَ وَيَهُوذَا وَهَتَفُوا وَلَحِقُوا ٱلْفِلِسْطِينِيِّينَ حَتَّى مَجِيئِكَ إِلَى ٱلْوَادِي، وَحَتَّى أَبْوَابِ عَقْرُونَ. فَسَقَطَتْ قَتْلَى ٱلْفِلِسْطِينِيِّينَ فِي طَرِيقِ شَعَرَايِمَ إِلَى جَتَّ وَإِلَى عَقْرُونَ. ٥٢ 52
और इस्राईल और यहूदाह के लोग उठे और ललकार कर फ़िलिस्तियों को गई और 'अक़रून के फाटकों तक दौड़ाया और फ़िलिस्तियों में से जो ज़ख़्मी हुए थे वह शा'रीम के रास्ते में और जात और 'अक्रू़न तक गिरते गए।
ثُمَّ رَجَعَ بَنُو إِسْرَائِيلَ مِنْ ٱلِٱحْتِمَاءِ وَرَاءَ ٱلْفِلِسْطِينِيِّينَ وَنَهَبُوا مَحَلَّتَهُمْ. ٥٣ 53
तब बनी इस्राईल फ़िलिस्तियों के पीछे से उलटे फिरे और उनके ख़ेमों को लूटा।
وَأَخَذَ دَاوُدُ رَأْسَ ٱلْفِلِسْطِينِيِّ وَأَتَى بِهِ إِلَى أُورُشَلِيمَ، وَوَضَعَ أَدَوَاتِهِ فِي خَيْمَتِهِ. ٥٤ 54
और दाऊद उस फ़िलिस्ती का सर लेकर उसे येरूशलेम में लाया और उसके हथियारों को उसने अपने डेरे में रख दिया।
وَلَمَّا رَأَى شَاوُلُ دَاوُدَ خَارِجًا لِلِقَاءِ ٱلْفِلِسْطِينِيِّ قَالَ لِأَبْنَيْرَ رَئِيسِ ٱلْجَيْشِ: «ٱبْنُ مَنْ هَذَا ٱلْغُلَامُ يَا أَبْنَيْرُ؟» فَقَالَ أَبْنَيْرُ: «وَحَيَاتِكَ أَيُّهَا ٱلْمَلِكُ لَسْتُ أَعْلَمُ». ٥٥ 55
जब साऊल ने दाऊद को उस फ़िलिस्ती का मुक़ाबिला करने के लिए जाते देखा तो उसने लश्कर के सरदार अबनेर से पूछा अबनेर यह लड़का किसका बेटा है? अबनेर ने कहा, ऐ बादशाह तेरी जान की क़सम में नहीं जानता।
فَقَالَ ٱلْمَلِكُ: «ٱسْأَلِ ٱبْنُ مَنْ هَذَا ٱلْغُلَامُ». ٥٦ 56
तब बादशाह ने कहा, तू मा'लूम कर कि यह नौजवान किस का बेटा है।
وَلَمَّا رَجَعَ دَاوُدُ مِنْ قَتْلِ ٱلْفِلِسْطِينِيِّ أَخَذَهُ أَبْنَيْرُ وَأَحْضَرَهُ أَمَامَ شَاوُلَ وَرَأْسُ ٱلْفِلِسْطِينِيِّ بِيَدِهِ. ٥٧ 57
और जब दाऊद उस फ़िलिस्ती को क़त्ल कर के फ़िरा तो अबनेर उसे लेकर साऊल के पास लाया और फ़िलिस्ती का सर उसके हाथ में था।
فَقَالَ لَهُ شَاوُلُ: «ٱبْنُ مَنْ أَنْتَ يَا غُلَامُ؟» فَقَالَ دَاوُدُ: «ٱبْنُ عَبْدِكَ يَسَّى ٱلْبَيْتَلَحْمِيِّ». ٥٨ 58
तब साऊल ने उससे कहा, “ऐ जवान तू किसका बेटा है?” दाऊद ने जवाब दिया, “मैं तेरे ख़ादिम बैतलहमी यस्सी का बेटा हूँ।”